चेन्नई — तमिलनाडु सरकार ने एक सरकारी आदेश वापस ले लिया है, जिसने सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था) विभाग को सूचना अधिनियम से मुक्त किया था, विपक्षी दलों और नागरिक समाज समूहों की तीव्र आलोचना के बाद। यह आदेश, जो इस वर्ष पहले जारी किया गया था, राज्य की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता से पीछे हटने के रूप में देखा गया और 27 सितंबर 2026 को रद्द कर दिया गया।
सार्वजनिक आक्रोश के बाद सरकार ने RTI छूट वापस ली
15 अगस्त 2026 को तिथि वाला यह आदेश गृह विभाग द्वारा जारी किया गया था और इसमें घोषणा की गई थी कि सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था) विभाग सूचना अधिनियम, 2005 के प्रावधानों से मुक्त रहेगा। यह छूट “सुरक्षा और परिचालन संवेदनशीलता” के आधार पर उचित ठहराई गई थी और इसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन की ऐसी जानकारी की रक्षा करना था, जो चल रही जांचों को खतरे में डाल सकती है।
विपक्षी दल, जिनमें ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ा मुनेत्रा काजगम (AIADMK) और तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की इकाई शामिल हैं, ने तुरंत इस कदम की निंदा की। उन्होंने तर्क दिया कि यह छूट सूचना अधिनियम की भावना का उल्लंघन करती है, जो सभी सरकारी निकायों को सार्वजनिक जांच के लिए खुला रहने की मांग करती है, जब तक कि कोई वैधानिक छूट लागू न हो। तमिलनाडु RTI फोरम और सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स जैसी नागरिक समाज संगठनों ने भी इस आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए बयान जारी किए।
सूचना और सार्वजनिक संबंध विभाग द्वारा जारी एक बयान में अधिकारियों ने कहा कि यह आदेश त्रुटि से जारी किया गया था और सरकार का उद्देश्य विभाग के लिए एक सर्वसमावेशी छूट बनाना नहीं था। बयान में यह भी जोड़ा गया कि विभाग सूचना अधिनियम के अधीन रहेगा और किसी भी ऐसी जानकारी को, जो सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है, मौजूदा वैधानिक छूटों के तहत संभाला जाएगा।
वापसी उन कई सार्वजनिक सुनवाइयों और तमिलनाडु उच्च न्यायालय द्वारा 20 सितंबर 2026 को दायर याचिका के बाद आई। सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ताओं के गठबंधन द्वारा दायर याचिका ने कहा कि यह आदेश सूचना अधिकार अधिनियम की धारा के विरुद्ध है और यह “सूचना सार्वजनिक वस्तु है” सिद्धांत का उल्लंघन करता है। 24 सितंबर को जारी न्यायालय के आदेश ने राज्य को छूट को निरस्त करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विभाग अधिनियम का पालन करे।
न्यायालय के निर्देश के बाद, राज्य सरकार ने 27 सितंबर को एक नया सरकारी आदेश जारी किया, जिसमें पूर्व की छूट को निरस्त किया गया। नया आदेश पुष्टि करता है कि सार्वजनिक (कानून एवं व्यवस्था) विभाग सूचना अधिकार अधिनियम के दायरे में रहेगा, तथा राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता से संबंधित मामलों के लिये सामान्य वैधानिक छूटें लागू रहेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उलटफेर विपक्ष और जनता दोनों से बढ़ते दबाव के प्रत्युत्तर में किया गया है। इस कदम से राज्य की पारदर्शिता तंत्र में विश्वास पुनः स्थापित होने की उम्मीद है तथा तमिलनाडु की प्रथाओं को सूचना अधिकार अधिनियम के राष्ट्रीय ढाँचे के अनुरूप किया जाएगा।
2005 में पारित सूचना अधिकार अधिनियम नागरिकों को किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण से सूचना का अनुरोध करने की अनुमति देता है, बशर्ते कुछ सीमित छूटें लागू हों। यह कानून भारत की लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व का मुख्य स्तम्भ रहा है, और राज्य सरकारों को इसके प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है, जब तक कि कोई विशिष्ट छूट विधि द्वारा प्रदान न की गई हो।
वापसी के बाद, गृह विभाग ने अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु अपनी सूचना‑प्रसंस्करण प्रक्रिय
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- After backlash, Tamil Nadu government withdraws G.O. exempting Public (Law and Order) Depa
- Vijay’s TVK Government Withdraws Controversial RTI Move Amid Backlash – ndtv.com
- Vijay Govt Revokes RTI Exemption for Law and Order Dept After Backlash – Deccan Chronicle
- Tamil Nadu RTI Rollback, Opposition Backlash And TVK U-Turn – India Today – India Today