नई दिल्ली — 27 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के अपने एपिसोड में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भुवनेश्वर जिले के मोदेरा शहर के उल्लेखनीय विकास पर प्रकाश डाला, जो 1,000‑वर्षीय सूर्य मंदिर स्थल से भारत के पहले ऐसे गाँव तक पहुँचा जो 24 घंटे, 7 दिन सौर ऊर्जा पर चलता है।
ऐतिहासिक जड़ें और आधुनिक ऊर्जा
मोधेरा अपने सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो 1026 ईस्वी में चौलुक्य वंश के राजा भिमा प्रथम द्वारा निर्मित एक बलुआ पत्थर का मंदिर है। मंदिर की वास्तुकला, जिसमें ऊँचा विमान और जटिल नक्काशी शामिल है, ने शताब्दियों से विद्वानों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया है। मोदी के बयानों ने शहर की प्राचीन विरासत और देश की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंडा में इसकी समकालीन भूमिका के बीच एक सीधा संबंध स्थापित किया।
एनर्जीवर्ल्ड रिपोर्ट के अनुसार, इस गाँव ने सार्वजनिक भवनों, स्कूलों और निजी घरों को कवर करने वाले फोटोवोल्टाइक पैनलों का एक नेटवर्क स्थापित किया है। 2025 की शुरुआत में शुरू हुई यह सौर एरे पूरी समुदाय को पर्याप्त बिजली आपूर्ति करती है, जिससे डीजल जनरेटर की आवश्यकता समाप्त हो गई है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
सरकारी समर्थन और सामुदायिक प्रभाव
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 2024 में 12‑महीने के पायलट कार्यक्रम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य गुजरात के 50 गाँवों को 24
‘मन की बात’ मुख्य बिंदु और राष्ट्रीय महत्व
अपने संबोधन में, मोदी ने मोधेरा की प्रगति को “भारत की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक” कहा। उन्होंने उल्लेख किया कि गाँव की सफलता पूरे देश में ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए एक मॉडल बन सकती है। प्रधान मंत्री ने गुजरात राज्य ऊर्जा विभाग की सौर अवसंरचना की स्थापना और रखरखाव के समन्वय में भूमिका का भी उल्लेख किया।
‘मन की बात’ प्रसारण ने विस्तृत तकनीकी विवरण नहीं दिया, परन्तु 2030 तक 100 % नवीकरणीय विद्युत प्राप्त करने के व्यापक नीति लक्ष्य पर बल दिया। इस कार्यक्रम ने राष्ट्रीय सौर मिशन के 2026 तक 100 GW सौर क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
भविष्य की योजनाएँ और विस्तार
एमएनआरई के अधिकारियों ने घोषणा की कि मोधेरा मॉडल को अगले दो वर्षों में अतिरिक्त 15 गाँवों में दोहराया जाएगा। इस योजना में स्थानीय तकनीशियनों का प्रशिक्षण, सौर रखरखाव केंद्रों की स्थापना, तथा बादल वाले समय में निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बैटरी भंडारण का एकीकरण शामिल है।
मोधेरा के परिवर्तन ने धरोहर संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के संगम का अध्ययन करने वाले शैक्षणिक संस्थानों का ध्यान आकर्षित किया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर के शोधकर्ताओं ने सौर गाँव के स्थानीय आजीविका पर सामाजिक‑आर्थिक प्रभावों का केस स्टडी शुरू किया है।
जैसे ही भारत अपनी सौर उपस्थिति का विस्तार करता जा रहा है, मोधेरा यह स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है कि प्राचीन स्थलों को आधुनिक स्थिरता लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए कैसे उपयोग किया जा सकता है। गाँव का 24 घंटे निरंतर सौर संचालन, जिसे प्रधान मंत्री ने अपने ‘मन की बात’ संबोधन में प्रथम बार उजागर किया, ग्रामीण समुदायों की आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को रेखांकित करता है।