नई दिल्ली — भारत के रक्षा मंत्रालय ने आज एक तथ्य‑पत्र जारी किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश की प्रगति को दर्शाता है। प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा 27 सितंबर 2026 को जारी किया गया
नीति ढांचा और निवेश
तथ्य पत्र (फैक्ट शीट) में राष्ट्रीय रक्षा नीति 2022 और रक्षा उत्पादन व खरीद नीति 2024 का उल्लेख किया गया है, जिनमें घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने स्वतंत्र प्रणालियों, उन्नत सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के लिए अतिरिक्त निधि आवंटित की है। इसमें रक्षा नवाचार कोष (Defence Innovation Fund) की स्थापना का भी उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य रक्षा प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहे स्टार्ट-अप्स और छोटे-मध्यम उद्यमों को समर्थन प्रदान करना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
मंत्रालय के अनुसार, आत्मनिर्भरता की ओर किया गया यह बदलाव आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन (resilience) को बेहतर बनाने और महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए लीड टाइम को कम करने में सहायक होगा। तथ्य पत्र में बताया गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में रक्षा खरीद चक्र औसतन 18 महीने कम हुआ है, जिसे घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि का परिणाम माना गया है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जारी रहेगा
हालांकि आत्मनिर्भरता पर जोर एक केंद्रीय विषय है, मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी बल दिया है। तथ्य पत्र में उल्लेख किया गया है कि भारत ने संयुक्त राज्य ब्रिटेन, फ्रांस और इज़राइल जैसे साझेदारों के साथ कई रक्षा सहयोग समझौते किए हैं, जिनका उद्देश्य प्रौद्योगिकी स्थानांतरण और नई प्लेटफॉर्मों का संयुक्त विकास करना है।
भविष्य की दृष्टि
मंत्रालय के विज्ञापन में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि आगामी वर्षों में रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा एक प्राथमिकता बनी रहेगी। इसमें स्वदेशी सबमरीन कार्यक्रम और अगली पीढ़ी के फाइटर जेट के विकास जैसे आगामी परियोजनाओं पर प्रकाश डाला गया है, जिनका पूर्ण होने का लक्ष्य 2030 तक रखा गया है।