न्यूयॉर्क — इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण में गाज़ा में अपने सरकार के सैन्य कार्यों का बचाव किया, जिससे कई प्रतिनिधिमंडलों ने भाषण समाप्त होने से पहले ही बहिष्कार कर दिया। यह घटना महासभा के मुख्य हॉल में हुई, जहाँ इज़राइल के प्रतिनिधिमंडल के साथ 30 अन्य देशों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
प्रतिनिधि तनाव के बीच बहिष्कार
BBC News और Africanews की रिपोर्टों के अनुसार, बहिष्कार नेतन्याहू के टिप्पणियों के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के गाज़ा संघर्ष के प्रबंधन की आलोचना की और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख यास्मिन मामदानी को “अन्यायपूर्ण पक्षपात” के लिए निशाना बनाया। यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और कई अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने इस भाषण को “असम्मानजनक” और “उत्तेजक” बताते हुए कक्ष से बाहर निकल गए। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि बहिष्कार एक “राजनीतिक वक्तव्य” था और सत्र बिना अनुपस्थित प्रतिनिधिमंडलों के जारी रहा।
इज़राइल के प्रधानमंत्री का भाषण, महासभा के सामने मंच से दिया गया, हामास द्वारा उत्पन्न सुरक्षा खतरों और गाज़ा युद्ध के व्यापक क्षेत्रीय प्रभावों पर केंद्रित था। उन्होंने इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों को “आवश्यक और अनुपातिक” बताया और संयुक्त राष्ट्र से संघर्ष की “जटिल वास्तविकता” को मान्यता देने का आग्रह किया। भाषण में संयुक्त राष्ट्र की “चयनात्मक रिपोर्टिंग” की आलोचना और क्षेत्र के अन्य अभिनेताओं की अधिक जवाबदेही की मांग भी शामिल थी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएँ
घटना के बाद के दिनों में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कर ज. के. श्नाइडर ने एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने बहिष्कार को “महत्वपूर्ण व्यवधान” बताया, परंतु महासभा अपने एज
यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की। यूरोपीय संघ के विदेश नीति कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रस्थान ने “गाज़ा युद्ध को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में गहरी विभाजन को उजागर किया है।” प्रवक्ता ने यह भी कहा कि संघ स्थिति की करीबी निगरानी करता रहेगा।
नेटान्याहू का राजनीतिक संदर्भ
नेटान्याहू का भाषण उनके सरकार पर बढ़ते घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बीच आया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री को गाज़ा अभियान के संचालन को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज समूहों से आलोचना का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह भाषण आगामी संसदीय चुनावों से पहले घरेलू समर्थन जुटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
एनबीसी न्यूज़ के अनुसार, इज़राइल सरकार ने यह कहा है कि उसके संचालन अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप हैं और देश “आतंकवाद के खिलाफ वैध रक्षा” कर रहा है। इस भाषण में व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य का भी उल्लेख किया गया, जिसमें ईरान के हमास को समर्थन देने के आरोपों का हवाला दिया गया और “क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा” की माँग की गई।
संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही पर प्रभाव
प्रस्थान ने महासभा के कार्यक्रम को नहीं रोका। संक्षिप्त विराम के बाद सत्र पुनः शुरू हुआ, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गाज़ा में “शांतिपूर्ण समाधान” और “मानवीय पहुँच” के महत्व पर बयान दिया। गुटेरेस ने इज़राइल और हमास के साथ कूटनीतिक संपर्क में “पुनर्स्थापना” की भी अपील की।
परिणामस्वरूप, कई संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने संकेत दिया है कि वे प्रस्थान से उठे प्रश्नों को संबोधित करने हेतु
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Netanyahu defends Israeli military action as delegates walk out before UN speech
- UN delegates walk out at Netanyahu defends Israeli military action – africanews.com
- Netanyahu defends military action, rips Mamdani, in fiery UN speech – The Center Square
- Israel’s Netanyahu takes the U.N. stage facing global isolation and a fight for his politi