नई दिल्ली — भारत की चुनाव आयोग (ECI) को एक नई संकट का सामना करना पड़ रहा है, जब रिपोर्टें सामने आईं कि उसने शेड्यूल्ड इम्प्लीमेंटेशन रिव्यू (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड हटा दिए। आलोचकों का कहना है कि यह कदम स्थापित नियमों को बायपास करता है, और इससे आंतरिक असहमति के नोट्स सामने आए हैं जो सुप्रीम कोर्ट के SIR प्रक्रिया के पूर्व समर्थन को चुनौती देते हैं।
सामूहिक विलोपन से मतदाता सूची की अखंडता पर प्रश्न उठते हैं
हिंदू के एक रिपोर्ट के अनुसार, ECI के हालिया SIR अभ्यास के परिणामस्वरूप चुनावी पंजीकरणों से लाखों नाम हटाए गए। लेख में उल्लेख है कि विलोपन प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 में उल्लिखित दिशानिर्देशों के पूर्ण अनुप्रयोग के बिना किया गया। रिपोर्ट यह भी बताती है कि विलोपन के साथ आवश्यक सार्वजनिक सूचना नहीं दी गई, जो आम तौर पर ऐसे परिवर्तनों के लिए अनिवार्य होती है।
आंतरिक असहमति के नोट्स से आयोग के भीतर विभाजन की ओर इशारा
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के समर्थन के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला किया
इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया है कि विपक्षी नेताओं ने इन आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की मतदाता सूची प्रबंधन की आलोचना की है। लेख में बताया गया है कि विपक्ष ने हटाए गए प्रविष्टियों पर संसदीय जांच की मांग की है और सुप्रीम कोर्ट से मामले की पुनः समीक्षा का अनुरोध किया है। यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले के बाद आई है, जिसमें उसने चुनावी रोल को सुव्यवस्थित करने के साधन के रूप में SIR को स्वीकृति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व स्वीकृति और वर्तमान जांच
सुप्रीम कोर्ट के 2026 के निर्णय, जिसे कई मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्ट किया, ने चुनाव आयोग द्वारा SIR के प्रयोग को दोहराव वाले और अयोग्य प्रविष्टियों को मतदाता सूची से हटाने के लिए मान्य किया था। न्यायालय के फैसले ने एक स्वच्छ और अद्यतन चुनावी रजिस्टर की आवश्यकता पर बल दिया। तथापि, हालिया आरोप संकेत देते हैं कि SIR के कार्यान्वयन में न्यायालय के अपने निर्णय में निर्धारित प्रक्रियात्मक मानदंडों से विचलन हो सकता है।
जैसे ही विवाद विकसित हो रहा है, चुनाव आयोग ने दोहराया है कि वह हटाए गए प्रविष्टियों की समीक्षा करेगा और संसद को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा है कि वह SIR प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न किसी भी प्रक्रियात्मक अस्पष्टता को स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के साथ संवाद करेगा।