India’s Fertilizer Subsidy Could Top ₹3 Lakh Crore in FY 2026‑27

The central government’s subsidy plan for the 2026‑27 fiscal year may exceed ₹3 lakh crore, a rise that could reshape the agricultural budget amid concerns over El Nino‑impacted rabi crops.
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नई दिल्ली — कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है, जो पिछले वर्ष के लिए आवंटित 2.4 लाख करोड़ रुपये की तुलना में एक तीव्र वृद्धि है। द हिंदु बिज़नेस लाइन के एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि एल निनो घटना के कारण रबी फसलों की उपज में कमी के अनुमान के बीच किसानों को समर्थन प्रदान करने के लिए एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

जलवायव्युत्पन्न अनिश्चितता के बीच सब्सिडी में उछाल

सरकार की सब्सिडी नीति, जो यूरिया, डीएपी और अन्य प्रमुख खादों की लागत का 90 प्रतिशत कवर करती है, वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इस वृद्धि का कारण उच्च खरीद मूल्य और एक नीतिगत बदलाव है, जिसका उद्देश्य सब्सिडी दर को बाजार मूल्य के 80 प्रतिशत पर बनाए रखना है, जो बदलाव 2026 के बजट भाषण में घोषित किया गया था।

वित्त वर्ष 2025-26 में सब्सिडी 2.4 लाख करोड़ रुपये पर थी, एक आंकड़ा जो पहले से ही कृषि और खाद्य प्रसंस्करण बजट पर दबाव डाल रहा था। 28 सितंबर को एक प्रेस ब्रीफिंग में जारी नया अनुमान संकेत देता है कि मंत्रालय उच्च सब्सिडी स्तर को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 12 मिलियन टन यूरिया और 4 मिलियन टन डीएपी खरीदेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में उल्लेख किया कि यह सब्सिडी “कृषि क्षेत्र में एक आवश्यक निवेश” है और वित्तीय घाटा उच्च कर राजस्व और लक्षित खर्च कटौती के संयोजन के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने जोड़ा कि सब्सिडी को घरेलू उधार और अन्य क्षेत्रों से निधियों के पुनर्वितरण के मिश्रण के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा।

एल निनो, जो सिंधु-गंगा मैदानों में शुष्क स्थितियां लाने की उम्मीद है, कृषि सचिव की चेतावनी के अनुसार, जो इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित हुई थी, रबी फसलों की उपज को 15 प्रतिशत तक कम कर सकती है। सचिव ने उल्लेख किया कि कम बारिश गेहूं और जौ की उत्पादन को प्रभावित करेगी, जिससे राष्ट्रीय अनाज उत्पादन में 5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

इसके जवाब में, मंत्रालय ने एक आपातकालीन योजना की घोषणा की है, जिसमें सिंचाई के लिए अतिरिक्त सब्सिडी और सूखा-रोधी बीज किस्मों की उपलब्धता शामिल है। योजना में गेहूं के लिए मूल्य समर्थन में अस्थायी वृद्धि की भी मांग की गई है ताकि बाजार की अस्थिरता के खिलाफ किसानों की रक्षा की जा सके।

विश्लेषकों का कहना है कि सब्सिडी वृद्धि उस समय आती है जब सरकार को वित्तीय घाटे को कम करने के दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसका अनुमान वित्तीय वर्ष 2026‑27 के लिए जीडीपी का 6.5 प्रतिशत होने का है। केंद्रीय बैंक के हालिया नीति विवरण से स्पष्ट होता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक तरलता पर सतर्क रुख बनाए रखेगा ताकि मुद्रास्फीति के दबाव से बचा जा सके।

वित्त मंत्रालय ने कृषि मंत्रालय से 15 अक्टूबर तक विस्तृत लागत‑लाभ विश्लेषण प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है, ताकि अतिरिक्त व्यय को उचित ठहराया जा सके। यह विश्लेषण राष्ट्रीय बजट पर प्रभाव, कृषि उत्पादकता में संभावित वृद्धि, तथा सब्सिडी योजना की दीर्घकालिक स्थिरता की जांच करेगा।

किसान संघों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। कुछ समूह उच्च सब्सिडी को राहत उपाय के रूप में स्वागत करते हैं, जबकि अन्य का तर्क है कि आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण यह इनपुट लागत में कमी नहीं लाएगी। नेशनल फार्मर्स यूनियन (NFU) ने उर्वरकों की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने हेतु खरीद प्रक्रिया की समीक्षा का आह्वान किया है।

व्यापक संदर्भ में, सब्सिडी वृद्धि सरकार की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक खाद्यान्न उत्पादन को 1.5 अरब टन

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