नई दिल्ली — कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारतीय कक्षाओं में पेश किया जा रहा है, परन्तु छात्रों और शिक्षकों की तत्परता देश भर में अत्यधिक विविध है। 8 अक्टूबर 2026 को द वीक द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट ने मशीन‑आधारित शिक्षा में बढ़ती रुचि को उजागर किया, यह बताया कि कुछ स्कूलों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट्स ने सहभागिता और मूल्यांकन गति में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। फिर भी उसी रिपोर्ट ने संकेत दिया कि यह प्रौद्योगिकी अभी मुख्यधारा में अपनाए जाने से काफी दूर है।
ग्रामीण स्कूलों में सीमित बुनियादी ढांचा
बिहार के पटना जिले में, रोहतास में स्थित एक सरकारी स्कूल में 82 छात्र एक ही कक्षा में पढ़ते हैं जहाँ केवल एक ब्लैकबोर्ड उपलब्ध है। 8 अक्टूबर 2026 को टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा इस स्कूल की रिपोर्ट ने शहरी स्कूलों में लागू किए जा रहे डिजिटल कक्षाओं के विपरीत इस स्थिति की तीव्र असमानता को उजागर किया। लेख में बताया गया कि रोहतास स्कूल के शिक्षक हाथ से लिखे नोट्स और चाक पर निर्भर हैं, कंप्यूटर या विश्वसनीय बिजली की अनुपलब्धता के कारण एआई‑आधारित शिक्षण उपकरणों का एकीकरण कठिन हो रहा है।
आईआईटी मद्रास में नवाचार
आईआईटी मद्रास के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रहलाद जोशी ने छात्र नवाचार और शिक्षा के भविष्य पर हाल ही में आयोजित एक संगोष्ठी में भाषण दिया। 8 अक्टूबर 2026 को इंडिया टुडे द्वारा इस कार्यक्रम की रिपोर्ट में बताया गया कि जोशी ने कक्षा उपयोग के लिए अनुकूलित एआई अनुप्रयोगों के विकास में अंतःविषय अनुसंधान की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने संस्थान के इनोवेशन एंड नॉलेज शेयरिंग (IKS) कार्यक्रम को उजागर किया, जो स्थानीय स्कूलों के साथ साझेदारी कर एआई‑आ
डिजिटल विभाजन और समानता संबंधी चिंताएँ
जबकि कुछ शहरी विद्यालय एआई चैटबॉट और अनुकूली शिक्षण मंचों के साथ प्रयोग शुरू कर चुके हैं, रोहतास के इस विद्यालय जैसे ग्रामीण विद्यालय अभी भी पारंपरिक शिक्षण विधियों पर निर्भर हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख में बताया गया कि विद्यालय की एक ही ब्लैकबोर्ड पर 82 छात्र पढ़ते हैं, जो अनुशंसित 30:1 अनुपात से कहीं अधिक है। यह भीड़भाड़ किसी भी ऐसी तकनीक की प्रभावशीलता को सीमित कर देती है, जो व्यक्तिगत संपर्क की मांग करती है, चाहे वह डिजिटल हो या मानवीय।
नीति एवं बुनियादी ढाँचा आवश्यकताएँ
सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2025 कक्षाओं में प्रौद्योगिकी के एकीकरण की मांग करती है, परन्तु कार्यान्वयन असमान रहा है। द वीक की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि शिक्षा मंत्रालय ने विद्यालयों में डिजिटल बुनियादी ढाँचे के लिये ₹15,000 करोड़ आवंटित किए हैं, परन्तु इन निधियों का अधिकांश भाग शहरी केंद्रों की ओर निर्देशित किया गया है। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि मंत्रालय ने 12 राज्यों में एआई‑आधारित मूल्यांकन उपकरणों के परीक्षण हेतु एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया है, परन्तु अब तक इस पायलट ने परिणामों का व्यापक मूल्यांकन प्रदान नहीं किया है।