India Boosts Defence Self‑Reliance Amid Strong US Partnership

The Ministry of Defence released a fact sheet on 27 September 2026 highlighting domestic production gains, while US Ambassador Sergio Gor witnessed the Yudh Abhyas 2026 exercise in Rajasthan, underscoring the growing Indo‑US defence collaboration.
अंग्रेजी में पढ़ें: English Dispatch →

नई दिल्ली — 27 सितंबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने एक तथ्य पत्रक प्रकाशित किया, जिसमें भारत की स्वावलंबी रक्षा उद्योग के निर्माण में प्रगति का विवरण दिया गया है। दस्तावेज़ में 15‑वर्षीय योजना का वर्णन है, जिसके तहत प्रमुख हथियार प्रणालियों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाएगा और महत्वपूर्ण घटकों के आयात पर निर्भरता घटाई जाएगी। उसी सप्ताह, अमेरिकी दूत सेर्जियो गोर राजस्थान गए और युद्ध अभ्यास 2026 का अवलोकन किया, जो भारत‑अमेरिका रक्षा साझेदारी की गहराई को दर्शाने वाला एक व्यापक संयुक्त अभ्यास था।

घरेलू उत्पादन में प्रगति

तथ्य पत्रक, जिसे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी किया गया, पिछले वर्ष में प्राप्त कई मील के पत्थरों को सूचीबद्ध करता है। इसमें उल्लेख है कि गुजरात में रक्षा उत्पादन केंद्र ने 5‑G रडार प्रणाली का सीरियल उत्पादन शुरू कर दिया है, एक ऐसी तकनीक जो पहले आयातित थी। दस्तावेज़ में यह भी रिपोर्ट किया गया है कि भारतीय नौसेना का स्वदेशी शिपयार्ड विजाखपट्नम में तीन नई स्टेल्थ फ्रिगेट्स में से पहली का निर्माण पूरा कर चुका है, जिसे 2024 में पूरा करने का लक्ष्य था।

PIB के प्रकाशन के अनुसार, मंत्रालय ने 2026‑27 के लिए अपनी रक्षा बजट आवंटन को ₹1.5 ट्रिलियन तक बढ़ा दिया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 12% की वृद्धि है। बजट में अगले‑पीढ़ी के विमानों के अनुसंधान एवं विकास के लिए ₹400 बिलियन और सेना के तोपखाने प्रणालियों के उन्नयन के लिए ₹300 बिलियन का आरक्षित किया गया है। तथ्य पत्रक यह बल देता है कि ये निवेश 2021 के राष्ट्रीय रक्षा नीति द्वारा निर्धारित “स्वावलंबन” लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से हैं।

युद्ध अभ्यास 2026: भारत‑अमेरिका सहयोग का प्रदर्शन

युद्ध अभ्यास 2026 को 20 से 25 सितंबर तक राजस्थान के थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया। इस अभ्यास में 10,000 से अधिक भारतीय सैनिकों और संयुक्त राज्य अमेरिका के तुलनीय बलों ने भाग लिया। इसमें संयुक्त वायु-आधारित ऑपरेशन्स, अरब सागर में नौसैनिक अभ्यास, और दोनों सेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता का परीक्षण करने वाले ज़मीनी चालें शामिल थीं।

अमेरिकी दूत सेर्जियो गोर, जो 2024 से नई दिल्ली में कार्यरत हैं, 22 सितंबर को अभ्यास स्थल पर पहुंचे। भारतीय दूतावास द्वारा जारी एक बयान में दूत ने कहा कि यह अभ्यास “दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करता है और जटिल संयुक्त ऑपरेशन्स संचालित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को उजागर करता है।” बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि यह अभ्यास 2020 से शुरू हुए व्यापक भारत‑अमेरिका रक्षा संवाद का हिस्सा था।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक निहितार्थ

वास्तविकता‑पत्र भारत की आत्मनिर्भरता पहल को इंडो‑पैसिफिक में बदलते भू‑राजनीतिक परिदृश्य के प्रत्युत्तर के रूप में प्रस्तुत करता है। यह क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समुद्री गश्तों की बढ़ती आवृत्ति और चीन की नौसैनिक संपत्तियों की बढ़ती उपस्थिति को घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ करने के प्रमुख प्रेरक के रूप में उद्धृत करता है।

उत्पादन मील के पत्थर के अतिरिक्त, दस्तावेज़ बेंगलुरु में स्थापित एक संयुक्त अनुसंधान केंद्र को उजागर करता है जो स्वायत्त हथियार प्रणालियों पर केंद्रित है। यह केंद्र रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO

Found an inaccuracy or broken citation? Submit a correction notice to our newsroom standards desk.
Advertisement