नई दिल्ली — रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट-75(I) के लिए 80,000 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) से लैस छह उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियों की खरीदारी की जाएगी। 4 अक्टूबर 2026 को रिपोर्ट की गई इस मंजूरी से योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है, जो भारत के जल-यंत्र (अंडर-सी) बेड़े की आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल का संकेत देती है।
रणनीतिक पृष्ठभूमि
प्रोजेक्ट-75(I) पिछले प्रोजेक्ट-75 के बाद आ रहा है, जिसके तहत फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ तकनीक स्थानांतरण समझौते के अंतर्गत निर्मित छह स्कॉर्पेन-कلاس पनडुब्बियाँ सौंपी गई थीं। नई ट्रांश का उद्देश्य पुरानी जहाजों को बदलना और भारतीय महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय शक्तियों द्वारा पनडुब्बियों की गतिविधियों में अनुभूत वृद्धि का मुकाबला करना है। रक्षा अधिकारियों ने इस खरीदारी को निरंतर जल-यंत्र डटरेन्स (विरोध) की आवश्यकता से जोड़ा है, विशेष रूप से तब जब चीनी और पाकिस्तानी नौसेना के संपत्ति क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम की सीमा और लागत
80,000 करोड़ रुपये की आवंटित राशि 10 वर्षों के अवधि में छह पनडुब्बियों के डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और डिलीवरी को कवर करती है। बजट में स्वदेशी जहाज निर्माण यार्ड के अपग्रेड, घरेलू घटकों के विकास और भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए ऑफसेट बाध्यताओं के लिए भी प्रावधान शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इन पनडुब्बियों में उन्नत सोनार सूट, स्टील्थ हल्स और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम होंगे, हालांकि विशिष्ट तकनीकी विनिर्देश वर्गीकृत (क्लासिफाइड) हैं।
औद्योगिक भागीदारी
घरेलू जहाज निर्माण यार्ड की केंद्रीय भूमिका निभाने की उम्मीद है। मंत्रालय ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल के तहत निर्माण कार्य संभालने के लिए तीन भारतीय कंपनियों—माझागॉन डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), एलएंडटी शिपबिल्डिंग लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड—को शॉर्टलिस्ट किया है। चयन प्रक्रिया, जो अभी समीक्षाधीन है, भविष्य की नौसेनाई प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वदेशी सामग्री को अधिकतम करने और एक टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
अतिरिक्त स्कॉर्पेन पर विचार
4 अक्टूबर 2026 को बिज़नेस टुडे ने रिपोर्ट किया कि रक्षा स्थापना एक व्यापक बेड़े विस्तार रणनीति के हिस्से के रूप में तीन और स्कॉर्पेन-कلاس पनडुब्बियों की खरीदारी पर भी विचार कर रही है। अतिरिक्त इकाइयों को सुरक्षा मंत्रिमंडल समिति (Cabinet Committee on Security) की अंतिम मंजूरी के अधीन, उसी बजट आवरण के तहत खरीदा जाएगा। विचार-विमर्श से परिचित स्रोतों ने कहा कि यह कदम नए और मौजूदा प्लेटफॉर्म्स का संतुलित मिश्रण प्राप्त करने में मदद करेगा, जबकि जहाज निर्माण यार्ड निर्माण प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने में सक्षम होंगे।
वित्तपोषण और अनुमोदन प्रक्रिया
₹80,000 करोड़ की राशि 4 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित ZoomNews रिपोर्ट में प्रकट की गई, जिसमें रक्षा मंत्रालय द्वारा सुरक्षा पर कैबिनेट समिति को दी गई ब्रीफिंग का हवाला दिया गया था। उस ब्रीफिंग में वित्तीय व्यय, अनुमानित समय-सीमा और घरेलू उद्योग के अपेक्षित योगदान का विवरण दिया गया था। उसी ब्रीफिंग का उल्लेख 5 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित सरकारी इकोनॉमिक टाइम्स लेख में भी किया गया, जिसमें पुष्टि की गई कि प्रस्ताव को अंतिम अनुमोदन चरण में ले जाया गया है।
समयरेखा और वितरण
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Project-75(I) and India’s ₹80000 crore submarine proposal: Maritime security meets industr
- Rangpo and Gangtok rail link: Railways fast track project worth Rs 9,000 crore – BigInfo.i
- India weighs 3 more Scorpene submarines as Project-75(I) moves closer to approval – Busine
- India Approves 80000 Crore Project For 6 New Advanced Submarines – zoomnews.in
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Project-75(I) and India’s ₹80000 crore submarine proposal: Maritime security meets industr
- Rangpo and Gangtok rail link: Railways fast track project worth Rs 9,000 crore – BigInfo.i
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- India Approves 80000 Crore Project For 6 New Advanced Submarines – zoomnews.in