नई दिल्ली — रक्षा मंत्रालय ने 7 अक्टूबर 2026 को ब्रह्मोस एरोस्पेस के साथ 661.50 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय नौसेना की स्ट्राइक फ्लीट में 100 सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें शामिल होंगी। यह सौदा नौसेना की समुद्री स्ट्राइक आर्किटेक्चर का विस्तार करता है और भारत की नौवीय विरोध (deterrence) को आधुनिकी करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
अनुबंध विवरण और रणनीतिक संदर्भ
रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित इस अनुबंध में 100 ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति शामिल है, जिनमें से प्रत्येक मिसाइल 2.8 मैक तक की गति से यात्रा करने में सक्षम है। ये मिसाइलें सतह पर तैरने वाले जहाजों, पनडुब्बियों और तटीय लॉन्च प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती हैं, जिससे नौसेना को सतह पर तैरने वाले लक्ष्यों और भूमि पर स्थित लक्ष्यों के विरुद्ध एक लचीला, उच्च-सटीकता वाला स्ट्राइक विकल्प उपलब्ध होता है।
यह सौदा एक श्रृंखला के अधिग्रहण चरणों के बाद आया है, जो 2024 में शुरू हुए थे, जब नौसेना ने 50 मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 2026 के अनुबंध में मात्रा दोगुनी कर दी गई है और डिलीवरी शेड्यूल 2030 तक बढ़ा दिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अधिग्रहण चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिसमें प्रारंभिक डिलीवरी 2027 के अंत में की जाने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस: एक संयुक्त भारतीय-रूसी उद्यम
ब्रह्मोस एरोस्पेस भारतीय नौसेना और रूस की यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन के बीच एक संयुक्त उद्यम (joint venture) है। इस मिसाइल प्रणाली का विकास पहली बार 1990 के दशक में किया गया था और यह 2008 में सेवा में शामिल हुई। तब से इसे संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम सहित कुछ देशों को निर्यात किया गया है।
भारतीय नौसेना ने प्रशिक्षण अभ्यासों और लाइव-फायर टेस्ट में ब्रह्मोस मिसाइलों का उपयोग किया है। 2026 के अनुबंध से नौसेना को इन मिसाइलों को अपनी नई श्रेणी की स्टील्थ फ्रिगेट्स और अरिहंत-श्रेणी की पनडुब्बियों में एकीकृत करने में सक्षम बनाएगा।
समुद्री सुरक्षा के लिए प्रभाव
भारत की समुद्री रणनीति ने लगातार एक स्तरबद्ध विरोध (layered deterrence) दृष्टिकोण पर जोर दिया है। ब्रह्मोस मिसाइलों के शामिल होने से नौसेना की क्षमता बढ़ती है, जिससे वह सतह पर तैरने वाले आक्रमणकारियों, फास्ट अटैक क्राफ्ट और संभावित एम्फीबियस लैंडिंग का विरोध कर सकती है। इन मिसाइलों की उच्च गति और कम रेडार क्रॉस-सेक्शन उन्हें पकड़ने और रोकने में कठिन बना देती हैं।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह अनुबंध नौसेना की 2025‑2030 खरीद योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 200 नई युद्धपोतों और 30 पनडुब्बियों को तैनात करना है। ब्रह्मोस प्रणाली को 2029 तक नौसेना के प्रमुख जहाज, INS Vikrant, में एकीकृत करने की उम्मीद है।
वित्तीय और औद्योगिक प्रभाव
₹661.50 करोड़ का यह अनुबंध भारत की स्वदेशी रक्षा उद्योग में एक महत्वपूर्ण निवेश का प्रतिनिधित्व करता है। चंडीगढ़ में स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस को मिसाइल उत्पादन और समर्थन सेवाओं के लिए अनुबंध मूल्य का एक हिस्सा प्राप्त होगा।
इस सौदे से कंपनी के विनिर्माण संयंत्रों में 1,200 सीधे रोजगार सृजित होने और इलेक्ट्रॉनिक्स, कंपोज़िट सामग्री तथा प्रोपल्शन सिस्टम जैसी सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
सरकार और उद्योग की प्रतिक्रियाएँ
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह खरीद व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समुद्री स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाना है। प्रवक्ता ने यह भी जोड़ा कि अनुबंध रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत लागू किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और राष्ट्रीय नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी ने कहा कि कंपनी नौसेना के आधुनिकीकरण में योगदान देने पर गर्व महसूस करती है। कार्यकारी ने यह भी जोड़ा कि कंपनी उच्चतम गुणवत्ता मानकों को बनाए रखेगी और सभी डिलीवरी समयसीमाओं को पूरा करेगी।
उद्योग के पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह अनुबंध भारतीय और रूसी रक्षा कंपनियों के बीच आगे के सहयोग को प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएँ संभव हो सकती हैं।
भविष्य की दृष्टि
यह अनुबंध भारत की स्वावलंबी रक्षा क्षमता की खोज में एक मील का पत्थर है। नौसेना भारतीय प्रशांत क्षेत्र में सहयोगी नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास करने की योजना बना रही है, ताकि नई मिसाइल प्रणाली का प्रदर्शन किया जा सके।
जैसे-जैसे नौसेना अपनी बेड़े का विस्तार करेगी, ब्रह्मोस मिसाइलें निवारण और परिचालन तत्परता में केंद्रीय भूमिका निभाएँगी। यह अनुबंध क्षेत्रीय अभिनेताओं को यह संकेत भी देता है कि भारत एक विश्वसनीय समुद्री निवारक बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- BrahMos Aerospace Secures ₹661.50-Crore Navy Contract as India Boosts Maritime Strike Capa
- BrahMos Aerospace secures over ₹661-crore Navy contract as India boosts maritime strike ca
- MoD signs ₹661 crore BrahMos contract to bolster Navy’s maritime strike capability – ET Ma
- ₹661 crore BrahMos contract expands Indian Navy’s supersonic maritime strike architecture