न्यू यॉर्क — 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष दिए गए अपने भाषण में, इज़राइली प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू ने अपने देश के सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया, जबकि उनके बोलने से पहले ही कई प्रतिनिधिमंडल हॉल से बाहर चले गए। इस कदम पर प्रेक्षकों द्वारा तीव्र आलोचना की गई और यह सवाल उठाया गया कि क्या संयुक्त राष्ट्र मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष पर एक निर्माणशील बहस आयोजित करने में सक्षम है।
संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों का हॉल छोड़ना
बीबीसी न्यूज़, अफ्रीकैन्यूज़, द सेंटर स्क्वायर और मध्य पूर्व मॉनिटर की रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू के भाषण से पहले अफ्रीकी और अन्य सदस्य देशों के कई प्रतिनिधिमंडल महासभा हॉल से बाहर चले गए। इन प्रस्थानों को इज़राइली नेता द्वारा प्रस्तुत किए गए एकतरफा दृष्टिकोण के विरोध में एक प्रदर्शन के रूप में वर्णित किया गया। ये हॉल छोड़ने की घटनाएं तब हुईं जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनी 81वीं सत्र की शुरुआत की थी।
नेतन्याहू का बचाव
महासभा कक्ष के पॉडियम से दिए गए अपने भाषण में, नेतन्याहू ने इज़राइल की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और क्षेत्र में दुश्मन तत्वों से आने वाले खतरों का मुकाबला करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र की स्थिति की आलोचना की और एक संयुक्त राष्ट्र अधिकारी, ममदानी, पर ‘अन्यायपूर्ण’ आलोचना करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने इज़राइल के स्वयं-रक्षा के अधिकार की पुष्टि की और तर्क दिया कि उनके सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य नागरिकों को रॉकेट हमलों और अन्य खतरों से बचाना है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अफ्रीकैन्यूज़ और मध्य पूर्व मॉनिटर ने इन हॉल छोड़ने की घटनाओं की रिपोर्ट करते हुए बताया कि यह कई अफ्रीकी देशों, जिनमें इथियोपिया, केन्या और नाइजीरिया शामिल हैं, द्वारा एक समन्वित प्रतिक्रिया थी, जिन्होंने इज़राइल के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र की मान्य पूर्वाग्रह का हवाला दिया। द सेंटर स्क्वायर ने उल्लेख किया कि प्रतिनिधियों का हॉल छोड़ना एक प्रतीकात्मक कदम था, जिसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की मध्य पूर्व संघर्ष में भूमिका पर चल रही व्यापक बहस पर ध्यान आकर्षित करना था। संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन महासचिव के कार्यालय ने पुष्टि की कि एक संक्षिप्त विराम के बाद महासभा का सत्र उस भाषण के साथ आगे बढ़ा।
पृष्ठभूमि
इज़राइल का हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के साथ संघर्ष हाल के वर्षों में बढ़ गया है, जिसमें 2026 की गाज़ा युद्ध ने एक महत्वपूर्ण वृद्धि को चिह्नित किया है। नेतन्याहू का भाषण एक सतत कूटनीतिक प्रयास के बीच आया, जिसका उद्देश्य युद्धविराम सुनिश्चित करना और मानवीय चिंताओं का समाधान करना था। इज़राइली सरकार ने बार-बार अपने सैन्य कार्यों को खतरों को निष्प्रभावी करने और इज़राइली नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं पर प्रभाव
इस घटना ने सामान्य सभा में मध्य पूर्व नीति पर बढ़ती ध्रुवीकरण को उजागर किया है। विश्लेषकों का कहना है कि बहिष्कार भविष्य के मतदान पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर संघर्ष से संबंधित प्रस्तावों पर। संयुक्त राष्ट्र ऐतिहासिक रूप से कूटनीतिक संवाद का मंच रहा है, परंतु इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अत्यधिक राजनीतिक विवादों में तटस्थ मंच को बनाए रखने की चुनौतियाँ कितनी गहरी हैं।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Netanyahu defends Israeli military action as delegates walk out before UN speech
- UN delegates walk out at Netanyahu defends Israeli military action – africanews.com
- Netanyahu defends military action, rips Mamdani, in fiery UN speech – The Center Square
- Delegates walk out as Netanyahu defends Israel’s regional wars in UN address – Middle East