लंदन — इज़राइल ने गुरुवार को घोषणा की कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए यूनाइटेड किंगडम पूर्वी जेरूसलेम स्थित ब्रिटिश कंसुलेट से अपने अधिकांश कूटनीतिक कर्मचारियों को वापस बुला लेगा। ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा कि यह कदम वीजा प्रोसेसिंग और ब्रिटिश नागरिकों को सहायता जैसी “महत्वपूर्ण सेवाओं” को प्रभावित नहीं करेगा, जो एक छोटी टीम द्वारा जारी रहेंगी।
पृष्ठभूमि और कूटनीतिक संदर्भ
2010 में स्थापित पूर्वी जेरूसलेम स्थित ब्रिटिश कंसुलेट एक विशेष स्थिति के तहत कार्यरत है, जो यूनाइटेड किंगडम की इस बात की गैर-मान्यता को दर्शाती है कि इज़राइल को शहर के पूर्वी भाग पर संप्रभुता प्राप्त है। यह मिशन ब्रिटिश नागरिकों को कंसुलर सहायता प्रदान करता है, यूनाइटेड किंगडम में यात्रा के लिए वीजा प्रोसेस करता है, और सांस्कृतिक व व्यापारिक पहलों का समर्थन करता है।
हाल के महीनों में बस्ती विस्तार, पवित्र स्थलों की स्थिति और इज़राइली-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया पर भिन्न दृष्टिकोणों के कारण इज़राइल और यूनाइटेड किंगडम के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि यूनाइटेड किंगडम से अपनी उपस्थिति कम करने का निर्देश देने का फैसला शहर में विदेशी मिशनों को लक्षित करने वाले एक श्रृंखलाबद्ध सुरक्षा घटनाओं के कारण लिया गया था।
कर्मचारियों की कमी के विवरण
इज़राइल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कंसुलेट आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए वरिष्ठ कूटनीतिक दूतों और स्थानीय कर्मचारियों की एक मूल टीम को बनाए रखेगा। वापस बुलाए जाने वाले कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन इज़राइली अधिकारियों ने इस कमी को “कूटनीतिक स्टाफ का अधिकांश हिस्सा” बताया।
ब्रिटिश अधिकारियों ने पुष्टि की कि शेष टीम में एक वरिष्ठ कूटनीतिक दूत, दो कंसुलर अधिकारी और कुछ स्थानीय रूप से नियुक्त कर्मचारी शामिल होंगे। यूनाइटेड किंगडम के विदेश, कॉमनवेल्थ और विकास मंत्रालय (एफसीडीओ) ने एक संक्षिप्त विज्ञप्ति जारी की, जिसमें संकेत दिया गया कि कम उपस्थिति कंसुलेट के मूल मंडेट को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।
ब्रिटिश प्रतिक्रिया
लंदन में एक प्रेस ब्रीफिंग में, मिलिबैंड ने जोर दिया कि यूनाइटेड किंगडम क्षेत्र में अपने कूटनीतिक संलग्नता प्रतिबद्ध रहता है। उन्होंने कहा कि स्टाफ कम करने का निर्णय इज़राइली अधिकारियों से परामर्श के बाद लिया गया था और इसका उद्देश्य ब्रिटिश कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ कंसुलेट की क्षमता को बनाए रखना था ताकि वह ब्रिटिश नागरिकों और अन्य हितधारकों को “महत्वपूर्ण सेवाएं” प्रदान कर सके।
“हमारा प्राथमिक लक्ष्य हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा और आवश्यक कौंसुली कार्यों की निरंतरता है,” मिलिबैंड ने कहा। “हम इज़राइली सरकार के साथ निकट सहयोग जारी रखेंगे ताकि शेष टीम प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।”
प्रतिक्रियाएँ और प्रभाव
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने इस कटौती को स्वीकार किया, इसे “सकारात्मक कदम” कहा, जो इज़राइल के विदेशी मिशनों के लिए “बढ़ते शत्रुतापूर्ण माहौल” को दर्शाता है। फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें उसने यूनाइटेड किंगडम से आग्रह किया कि वह कब्जे वाले क्षेत्रों में अपनी समग्र कूटनीतिक स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करे।
यूनाइटेड किंगडम ने, अपनी ओर से, दोहराया कि यह निर्णय पूर्वी यरूशलेम की स्थिति पर उसकी नीति में बदलाव का संकेत नहीं देता। एक वरिष्ठ एफसीडीओ प्रवक्ता ने कहा कि यूके पूर्वी यरूशलेम को अभी भी कब्जे वाली भूमि मानता है और टेल अवीव में अपनी दूतावास तथा संयुक्त राष्ट्र में अपनी मिशन सहित अन्य माध्यमों से अपनी कूटनीतिक सहभागिता बनाए रखेगा।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
अन्य पश्चिमी राजधानियों ने इस विकास पर बारी
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Most UK diplomats to leave East Jerusalem consulate, Israel says, as Miliband says ‘vital
- Most UK diplomats to leave East Jerusalem consulate, Israel says, as Miliband says ‘vital
- Most UK diplomats to leave East Jerusalem consulate as Miliband says ‘mission’ to remain –
- Israel, Britain strike deal over east Jerusalem consulate – The Jerusalem Post