आठ वर्षों के अंतराल के बाद 15 अक्टूबर को ओडिशा में छात्र संघ चुनाव

अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार 15 अक्टूबर को कॉलेज संघों के चुनाव कराने जा रही है, जिससे 2018 के बाद से बना अंतराल समाप्त होगा।
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भुवनेश्वर — ओडिशा सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि 15 अक्टूबर को छात्र संघ चुनाव आयोजित किए जाएंगे, जिससे कैंपस मतदान पर लगाए गए आठ वर्षों के निलंबन का अंत हो गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री द्वारा संदेशित यह निर्णय, कई कॉलेज निकायों द्वारा छात्रों के लिए लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए दायर किए गए याचिका के पश्चात लिया गया है।

पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा

ओडिशा में पिछले छात्र संघ चुनाव 2018 में आयोजित किए गए थे, जिसके बाद राज्य ने कैंपस हिंसा और राजनीतिक हस्तक्षेप की चिंताओं का हवाला देते हुए मतदान को निलंबित कर दिया था। 2018 में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक सर्कुलर के माध्यम से इस निलंबन को औपचारिक रूप दिया गया था, जिसमें राजनीतिक दलों को छात्र चुनावों में प्रतिस्पर्धा करने से रोक दिया गया था और मतदान की व्यवस्था का संचालन विभाग के प्रत्यक्ष निगरानी के अधीन रखा गया था।

ओडिशा विश्वविद्यालय अधिनियम, 1995 और राज्य उच्च शिक्षा नियमों, 2020 के तहत, प्रत्येक मान्यता प्राप्त कॉलेज को कम से कम हर तीन वर्षों में एक बार छात्र संघ चुनाव आयोजित करने होंगे। आठ वर्षों का यह अंतराल देखते हुए कई संस्थानों ने ओडिशा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर कीं, जिसमें तर्क दिया गया कि दीर्घकालिक निलंबन ने कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन किया है और छात्रों को शिकायत निवारण के लिए एक वैध मंच से वंचित कर दिया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सचिवालय में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में, शिक्षा मंत्री ने पुष्टि की कि विभाग ने 112 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों और 48 राज्य सहायता प्राप्त निजी संस्थानों में 15 अक्टूबर को चुनावों के संचालन के लिए रास्ता साफ कर दिया है। मंत्री ने कहा कि विभाग ने नामांकन प्रक्रिया, अभियान संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को रेखांकित करते हुए एक नई दिशा-निर्देशों की श्रृंखला जारी की है।

नई दिशा-निर्देशों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • नामांकन फॉर्म 20 सितंबर और 27 सितंबर के बीच जमा किए जाने होंगे।
  • प्रत्येक कॉलेज को प्रिंसिपल, एक वरिष्ठ शिक्षक और छात्र परिषद के एक प्रतिनिधि से मिलकर एक चुनाव समिति का गठन करना होगा।
  • अभियान सामग्री पर बाहरी राजनीतिक दलों के प्रतीकों का प्रयोग प्रतिबंधित है।
  • 15 अक्टूबर को मतदान केंद्रों की निगरानी के लिए कैंपस पुलिस टीमों की तैनाती की जाएगी।

मंत्री ने जोर दिया कि विभाग आवधिक ऑडिट के माध्यम से अनुपालन की निगरानी करेगा और दिशा-निर्देशों का कोई भी उल्लंघन राज्य सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बनेगा।

छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (AISF) ने इस घोषणा का स्वागत किया, यह कहते हुए कि चुनावों का पुनर्आगमन छात्रों की समस्याओं के लिए एक लोकतांत्रिक मंच को बहाल करेगा। संघ के राज्य सचिव ने कहा कि संगठन कई कॉलेजों में उम्मीदवार उतारेगा और प्रशासन से एक समान मैदान सुनिश्चित करने की अपील की है।

राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने भी आशावाद व्यक्त किया, यह बताते हुए कि आठ वर्ष के अंतराल ने छात्र प्रतिनिधित्व में शून्यता पैदा की है। NSUI के अधिकारियों ने सूचित किया कि वे 27 सितंबर की समय सीमा तक अपने उम्मीदवार सूचियाँ प्रस्तुत करेंगे।

इसके विपरीत, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चेतावनी दी कि संक्षिप्त समयावधि गहन प्रचार-प्रसार को सीमित कर सकती है। छात्र शाखा के राज्य अध्यक्ष ने उम्मीदवारों के लिए चुनावी आचरण पर अतिरिक्त प्रशिक्षण सत्रों का आह्वान किया।

संस्थागत तैयारी

राज्य भर के कॉलेज प्रमुखों ने रिपोर्ट किया कि उन्होंने चुनाव समितियाँ गठित करना और मतदान बूथों की व्यवस्था शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने तकनीकी सहायता की पेशकश की है, जिसमें उन संस्थानों के लिए इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की व्यवस्था शामिल है जो इसकी मांग करते हैं।

सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि मतदान स्थलों पर कुल 250 पुलिस कर्मी तैनात होंगे, साथ ही किसी भी असंतोष को दूर करने के लिए अतिरिक्त इकाइयाँ तैयार रहेंगी। भुवनेश्वर के पुलिस आयुक्त ने पुष्टि की कि बल

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