कांग्रेस ने चुनाव आयोग की पंजीकरण सूची में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की

पार्टी ने चुनाव आयोग के पंजीकरण परिवर्तनों के व्यापक ऑडिट के लिए पाँच मांगें प्रस्तुत कीं, जिससे जंतर मंतर में विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय चुनाव आयोग के इस्तीफे की मांगें उभरीं।
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नई दिल्ली — कांग्रेस के नेताओं ने गुरुवार को भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को दो वर्षों में किए गए मतदाता सूची में बदलावों की पूर्ण जानकारी माँगते हुए पाँच माँगों का सेट प्रस्तुत किया। ये माँगें उस बढ़ते विवाद के बीच आई हैं, जिसमें चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव प्राधिकरणों को मतदाता सूची संशोधनों के विवरण प्राप्त करने हेतु एक वैधानिक सूचना अनुरोध (एसआईआर) जारी किया था।

कांग्रेस ने ऑडिट और निगरानी की माँग की

पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि ईसीआई ने सूची में जोड़े या हटाए गए नामों की सूची सार्वजनिक नहीं की है, ऐसी कार्रवाई को आलोचकों ने आगामी चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने वाला बताया है। प्रेस विज्ञप्ति में जारी की गई इन माँगों में सभी सूची परिवर्तन का सार्वजनिक ऑडिट, सम्मिलन व विलोपन के मानदंडों की समीक्षा, एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति, भविष्य के सूची संशोधनों के लिए वैधानिक ढाँचा, तथा

चुनाव आयोग का प्रतिक्रिया और SIR विवाद

चुनाव आयोग ने अभी तक इन मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। हालाँकि, चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि आयोग “चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है” और यह “सभी कानूनी दायित्वों का पालन करेगा।” SIR, जिसे चुनाव आयोग ने 12 अगस्त 2026 को दायर किया था, में राज्य चुनाव आयोगों से पिछली आम चुनाव के बाद की गई मतदाता सूची (रोल) में परिवर्तनों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया था।

द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार, SIR चुनाव आयोग की एक व्यापक पहल का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी पर उठाए गए चिंताओं को दूर करना था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि चुनाव आयोग ने पहले ही राज्य स्तरीय निकायों को निर्देश जारी किया था कि वे सभी सूची संशोधनों का एक डिजिटल लॉग बनाए रखें।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

कांग्रेस की ये मांगें उस समय सामने आई हैं जब पार्टी 2027 के आम चुनावों की तैयारी में लगी हुई है। पार्टी नेतृत्व ने बार-बार चुनाव आयोग की आलोचना की है, जिसे उसने “अस्पष्ट प्रथाओं” के रूप में वर्णित किया है, जो मतदाताओं के विश्वास को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन मांगों को हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का भी प्रतिक्रिया माना गया, जिसमें चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में, एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ये मांगें “मुक्त और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक मंत्र के अनुरूप हैं।” नेता ने यह भी उल्लेख किया कि पार्टी ने पहले ही सूची परिवर्तनों को नियंत्रित करने के लिए एक “कानूनी ढांचे” की मांग की थी।

आगामी कदम

चुनाव आयोग से इन मांगों पर अगले 30 दिनों के भीतर प्रतिक्रिया देने की उम्मीद की जा रही है। यदि आयोग पालन करने में असमर्थ रहता है, तो कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह पारदर्शिता को लागू करने के लिए कानूनी राहों का सहारा लेगी। पार्टी ने चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने की भी अपील की है।

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