दिसपुर — असम सरकार के भूमि उपयोग से जुड़े निर्णयों पर न्यायिक निगरानी बनी हुई है, क्योंकि स्वतंत्र रिपोर्टों में मनास बाघ अभयारण्य के केंद्रीय क्षेत्र के भीतर निर्माण गतिविधियों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जो एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। 26 सितंबर 2026 को गौहाटी उच्च न्यायालय ने मामले की जांच के दौरान आगे की अवैध कब्जावरी को रोकने के लिए स्थिति को बनाए रखने (status-quo) का आदेश दिया।
कानूनी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि
उच्च न्यायालय का यह आदेश राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया है, जिसमें अभयारण्य के केंद्रीय क्षेत्र के भीतर अवैध बस्तियों और बुनियादी ढांचे परियोजनाओं से जुड़े बार-बार दिए गए चेतावनियों का हवाला दिया गया था। न्यायालय ने राज्य को मौजूदा सीमाओं को सुरक्षित रखने और विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जमा किए जाने तक किसी भी नई विकास गतिविधि से परहेज करने का निर्देश दिया।
अवैध कब्जावरी की सीमा
28 सितंबर 2026 को द डिप्लोमैट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उपग्रह चित्रण और जमीनी सर्वेक्षणों से पता चला कि कई सरकारी मंजूर सड़कें और आवास योजनाएं उन क्षेत्रों में बिछाई गई हैं, जिन्हें 2000 की मनास बाघ अभयारण्य प्रबंधन योजना के तहत “निर्यावना” (no-development) क्षेत्रों के रूप में निर्धारित किया गया था। असम ट्राइब्यून ने इस दावे की पुष्टि की, यह नोट करते हुए कि NTCA की सलाहकार नोटों के बावजूद यह अवैध कब्जावरी वर्षों से जारी है।
सरकारी प्रतिक्रिया
राज्य अधिकारियों ने कहा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और विस्थापित परिवारों को आवास प्रदान करना है, हालांकि उन्होंने रिज़र्व के कोर क्षेत्र के भीतर इन कार्यों को स्थित करने के लिए कोई विस्तृत औचित्य प्रस्तुत नहीं किया है। लेखन के समय में असम पर्यावरण और वन मंत्रालय से कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था।
संरक्षण संबंधी चिंताएं
मनस, जिसे 1985 में विश्व विरासत का दर्जा प्राप्त हुआ था, बंगाली बाघ, भारतीय गैंडे और 500 से अधिक पक्षी प्रजातियों का निवास स्थान है। संरक्षण विशेषज्ञों की चेतावनी है कि कोर क्षेत्र में होने वाला कोई भी विक्षोभ उस पारिस्थितिकीय अखंडता को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके आधार पर इसकी यूनेस्को सूचीकरण की गई थी।
आगामी कदम
हाई कोर्ट ने एनटीसीए (राष्ट्रीय वन संरक्षण प्राधिकरण) से 15 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन ऑडिट जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया है कि ऑडिट के निष्कर्षों के प्रतीक्षाकाल में चल रहे निर्माण कार्यों को स्थगित किया जाए और साफ किए गए वन ढाल को पुनर्स्थापित किया जाए।