नई दिल्ली — भारत द्वारा हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते का कृषि व्यापार पर मामूली प्रभाव होने की उम्मीद है, परंतु यह कृषि-प्रौद्योगिकी आयात के लिए एक नई खिड़की खोल सकता है, बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट ने सोमवार को कहा।
वर्तमान कृषि व्यापार पर सीमित प्रभाव
यह समझौता, जिसे 2025 में हस्ताक्षरित किया गया था, कुछ कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने का अनुमान है, परंतु दोनों पक्षों के बीच कृषि व्यापार का कुल वॉल्यूम अभी भी कम है। बिज़नेसलाइन लेख के अनुसार, भारत से यूरोपीय संघ को दुध, पोल्ट्री और कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात वर्तमान में कुल यूरोपीय संघ आयात का 1% से कम है, और एफटीए इस हिस्से को महत्वपूर्ण रूप से नहीं बदलेगा।
संदर्भ: भारत में कृषि प्राथमिकताओं में परिवर्तन
भारत का कृषि परिदृश्य बदल रहा है। एग्रीकल्चर पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि 2025 में खरीफ फसलों के क्षेत्रफल में 1.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें पारंपरिक खाद्य पदार्थों से उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर एक स्पष्ट झुकाव देखा गया है। यह रुझान उत्पादन में विविधता लाने की एक व्यापक रणनीति को दर्शाता है, हालांकि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि निर्यात पैटर्न में तत्काल परिवर्तन की सीमाएं अत्यंत संकीर्ण हैं।
इसके बीच, विजयवाड़ा से मिली स्थानीय खबरों के अनुसार, खेती के परिदृश्य में बदलाव के कारण बंदरों द्वारा फसलों को पहुंचाए नुकसान में वृद्धि दर्ज की गई है, जो किसानों को नए फसल पैटर्नों के अनुकूल होने में सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है। इन विकासों से संकेत मिलता है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों की तुलना में घरेलू कारक भारत के कृषि उत्पादन को आगे भी अधिक प्रभावित करते रहेंगे।
आधिकारिक स्थिति और भविष्य की दृष्टि
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा, जिसमें यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा कि नए आयात से घरेलू किसानों को कोई नुकसान न हो। मंत्रालय द्वारा 15 सितंबर 2026 को जारी विज्ञापन में तबदीली की गई है कि शुल्क में कटौती क्रमिक होगी और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षात्मक उपाय लागू किए जाएंगे।
नई दिल्ली में स्थित यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जारी एक बयान में, अधिकारियों ने कहा कि यह समझौदा “भोजन सुरक्षा, गुणवत्ता मानकों और टिकाऊ कृषि में सहयोग को मजबूत करेगा।” प्रतिनिधिमंडल ने कृषि-तकनीक (एग्री-टेक) में संयुक्त शोध परियोजनाओं के संभावित अवसरों पर भी प्रकाश डाला।
जैसे-जैसे FTA कार्यान्वयन चरण में प्रवेश करेगा, दोनों पक्ष व्यापार प्रवाहों और तकनीक स्थानांतरण पर इसके प्रभाव की निगरानी करेंगे। वर्तमान में, व्यापार विशेषज्ञों के बीच सहमति यह है कि हालांकि कृषि व्यापार के आकार में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं देखी जाएगी, लेकिन यह समझौदा भारत के विशाल कृषि बाजार में यूरोपीय एग्री-टेक समाधानों के अपनाने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।