संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधियों के प्रस्थान के बीच नेतन्याहू ने गाज़ा पर हमले का किया बचाव

25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में इज़राइली प्रधानमंत्री ने हालिया सैन्य कार्रवाई का औचित्य प्रस्तुत किया, जिसके बाद दर्जनों प्रतिनिधिमंडलों ने सभा से प्रस्थान कर लिया।
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न्यूयॉर्क — आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष दिए गए भाषण के दौरान, इज़राइली प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में गज़ा में किए गए सैन्य अभियान का बचाव किया, जिसके बाद 30 से अधिक देशों की प्रतिनिधिमंडलों ने सभा कक्ष से बाहर निकल लिया।

भाषण और सभा कक्ष से बाहर निकलना

नेतन्याहू ने स्थानीय समय के अनुसार सुबह 10:15 बजे सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने दावा किया कि इज़राइल के हमले का लक्ष्य “आतंकी बुनियादी ढांचा” था और नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सशस्त्र समूहों को “बार-बार चेतावनी” देने के बाद किया गया था और इज़राइल नागरिकों के नुकसान को न्यूनतम रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।

कुछ ही मिनटों के भीतर, यूरोपीय संघ, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मलेशिया और कई अरब देशों के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर पॉडियम छोड़ दिया और प्रधानमंत्री के बयान के बाद शुरू हुए बड़े पैमाने पर बाहर निकलने की घटना में शामिल हो गए। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस घटना में कम से कम 32 सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल थे।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोर्रेल ने इज़राइली कार्रवाई को “अनुपातहीन” बताया और तुरंत युद्धविराम की मांग की। दक्षिण अफ्रीका के संयुक्त राष्ट्र दूत लींडीवे मबुजा ने कहा कि यह हमला अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। ब्राजील के स्थायी प्रतिनिधि पॉलो टेक्सेरा ने इस अभियान को “अन्यायपूर्ण” करार देते हुए सुरक्षा परिषद से आपातकालीन बैठक बुलाने की अपील की।

इसके विपरीत, अमेरिकी दूत लींडा थॉमस-ग्रीनफील्ड द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए संयुक्त राज्य अमेरिका ने इज़राइल के स्वयं-रक्षा के अधिकार का समर्थन व्यक्त किया, हालांकि उन्होंने संयम की सलाह भी दी। यूनाइटेड किंगडम के दूत सर जेम्स कार्टर ने संतुलित दृष्टिकोण की मांग की, यह नोट करते हुए कि दोनों पक्षों के नागरिकों की सुरक्षा की आवश्यकता है।

सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि

22 सितंबर को शुरू किए गए इस अभियान में, गज़ा पट्टी में इज़राइली अधिकारियों द्वारा हथियारों के भंडार और कमांड केंद्रों के रूप में पहचाने गए स्थानों पर हवाई हमले किए गए। इज़राइली सेना के प्रवक्ता कर्नल योसी कोहेन ने रिपोर्ट किया कि इन हमलों में 12 मिसाइल स्थलों को नष्ट किया गया और 45 सशस्त्र समूहों के सदस्यों को मारा गया, जबकि उन्होंने दावा किया कि नागरिकों के नुकसान की सीमा केवल तीन व्यक्तियों तक ही सीमित थी।

संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्य समन्वय कार्यालय (ओचा) सहित अनेक मानवतावादी संगठनों ने सितंबर की शुरुआत में हुई तनाववृद्धि के बाद गज़ा में नागरिकों की मृत्युओं में वृद्धि का दस्तावेजीकरण किया है। ओचा के 24 सितंबर को जारी किए गए नवीनतम रिपोर्ट में संघर्ष की शुरुआत से अब तक 1,210 नागरिकों की मृत्यु दर्ज की गई है, एक आंकड़ा जिसे इजरायली अधिकारियों द्वारा अस्वीकार किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र प्रक्रियाएँ और अगले कदम

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष, कतर के अब्दुल्ला अल-गमदी ने, विरोध प्रदर्शन के बाद गज़ा की मानवतावादी स्थिति पर एक आपातकालीन बहस की मांग की है। उन्होंने घोषणा की कि 2 अक्टूबर को होने वाली अगली प्लेनरी बैठक में इजरायली कार्रवाई की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस सप्ताह के अंत में एक बैठक होने की संभावना है, जिसमें संभावित आतंकविराम प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। संयुक्त राज्य अमेरिका, जो एक स्थायी सदस्य है, ने संकेत दिया है कि वह ऐसे किसी भी प्रस्ताव का वीटो करेगा जिसे वह इजरायल के प्रति अत्यधिक आलोचनात्मक मानेगा।

इजरायल में घरेलू प्रतिक्रियाएँ

इजरायल के भीतर, नेतन्याहू की बचाव को मिश्रित प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। इजरायली विपक्षी दल, जिसका नेतृत्व यैर लैपिड कर रहे हैं, ने प्रधानमंत्री को “संघर्ष को तीव्र करने” के लिए आलोचना की और एक कूटनीतिक समाधान की मांग की। इसके विपरीत, दक्षिणपंथी दलों ने इस कार्रवाई की प्रशंसा की, जिसे उन्होंने जारी रॉकेट आग के जवाब में एक आवश्यक कदम के रूप में वर्णित किया।

इजरायली केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा 23 सितंबर को किए गए जनमत सर्वेक्षणों में दिखाया गया कि 58% इजरायली नागरिकों ने हाल की बमबारी का समर्थन किया, जबकि 27% ने इसका विरोध किया।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों ने उल्लेख किया कि अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून के तहत समानुपातिकता का सिद्धांत आवश्यक है कि किसी हमले की अपेक्षित सैन्य लाभ से अपेक्षित नागरिक हानि अधिक न हो। जेनेवा स्थित इंटरनेशनल लॉ इंस्टीट्यूट की प्रोफेसर मिरियाम एडलर ने उल्लेख किया कि “अभी तक प्रस्तुत प्रमाण समानुपातिकता मानकों के अनुपालन को निश्चित रूप से प्रदर्शित नहीं करते हैं।”

अमेनेस्टी इंटरनेशनल सहित मानव अधिकार एनजीओ ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करने की योजना की घोषणा की है, जिसमें संभावित युद्ध अपराधों का आरोप लगाया गया है।

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