नई दिल्ली — भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर स्टेंडिंग इन्वेस्टमेंट रिव्यू (SIR) का समर्थन किया और विपक्षी दलों पर राजनीतिक तूफान खड़े करने का आरोप लगाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान विपक्षी नेताओं की एक श्रृंखला बयानों के बाद जारी किया गया, जिन्हें पार्टी ने बेबुनियाद और भड़काऊ बताया।
भाजपा के इस संदेश में कहा गया है कि SIR सरकार की आर्थिक रणनीति का एक मूल घटक है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करना और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में सुधार लाना है। पार्टी ने दावा किया कि यह समीक्षा प्रथागत प्रक्रियाओं के अनुरूप है और वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के साथ संगत है।
भाजपा के अनुसार, विपक्षी दलों ने SIR को लेकर एक आलोचना अभियान शुरू किया है, जिसे सत्ताधारी पार्टी ने “राजनीतिक तूफान” के रूप में चिह्नित किया है। बयान में उल्लेख किया गया कि इस तरह की रणनीतियाँ सरकार के विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित ध्यान को भटकाने का काम करती हैं।
SIR का पृष्ठभूमि
स्टेंडिंग इन्वेस्टमेंट रिव्यू (SIR) का शुभारंभ जनवरी 2025 में किया गया था, जिसका उद्देश्य ऊर्जा, परिवहन और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर परियोजनाओं का मूल्यांकन करना है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समीक्षा पैनल को परियोजनाओं की व्यवहार्यता, वित्तीय संरचना और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन का आकलन करने का कार्य सौंपा गया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, SIR के शुभारंभ के बाद से अब तक 3.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इस समीक्षा को मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और परियोजनाओं में देरी को कम करने का एक प्रभावी साधन के रूप में प्रस्तुत किया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सदस्य शामिल हैं, ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, उन्होंने संसदीय समिति के गठन की मांग की ताकि समीक्षा के मानदंडों का परीक्षण किया जा सके, और यह आरोप लगाया गया कि कुछ परियोजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
भाजपा के बयान में इन मांगों को खारिज करते हुए कहा गया कि समीक्षा मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत संचालित होती है और किसी भी शिकायत को प्रस्थापित शिकायत निवारण चैनलों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह संवाद आगामी कई प्रमुख राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले होता है, जहाँ विपक्ष कथित शासन की कमियों का लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है। विश्लेषक बताते हैं कि भाजपा की रक्षात्मक मुद्रा चुनावी कैलेंडर से पहले आलोचना को पूर्वाभास करने की व्यापक रणनीति को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने 2024 में अपना तीसरा कार्यकाल आरम्भ किया, ने निवेश‑उन्मुख विकास के महत्व पर बार‑बार बल दिया है। अपने 2026 के बजट भाषण में उन्होंने बुनियादी ढाँचे के परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त ₹500 बिलियन आवंटित किया, जिनमें से कई को एसआईआर मूल्यांकन के लिए निर्धारित किया गया है।
सिविल सोसाइटी की प्रतिक्रियाएँ
उद्योगिक निकाय, जिनमें भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) भी शामिल है, ने एसआईआर को नौकरशाही बाधाओं को कम करने की दिशा में एक कदम के रूप में स्वागत किया है। एक CII प्रवक्ता ने कहा कि यह समीक्षा “बड़े पैमाने पर निवेश के लिए एक संरचित मार्ग प्रदान करती है, जो विकास की गति को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।”
इसके विपरीत, पर्यावरणीय गैर‑सरकारी संगठनों ने एसआईआर के तहत अनुमोदित परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के बारे में चिंता व्यक्त की है। विज्ञान और पर्यावरण केंद्र की एक बयान में सरकार से आग्रह किया गया कि वे तेज निवेश की खोज में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों से समझौता न करें।
आगे के कदम
भाजपा ने संकेत दिया कि वह एसआईआर के कार्यान्वयन पर निगरानी जारी रखेगी और आंतरिक ऑडिट के माध्यम से किसी भी प्रक्रियात्मक मुद्दों का समाधान करेगी। पार्टी ने यह भी संकेत