नई दिल्ली — वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की कि 2027 के वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का उधारी अनुमान ₹1.2 ट्रिलियन से घटा दिया गया है, और अक्टूबर‑मार्च के आधे वर्ष में बांड बिक्री के माध्यम से ₹7.86 ट्रिलियन जुटाएगा।
सुधारित उधारी दृष्टिकोण
इस संशोधन से पूरे वर्ष की उधारी आवश्यकता फरवरी 2026 में प्रस्तुत संघीय बजट में अनुमानित राशि से कम हो गई है। मंत्रालय ने कहा कि यह कटौती अपेक्षित से कम वित्तीय दबाव और अधिक अनुकूल राजस्व दृष्टिकोण को दर्शाती है।
नई योजना के तहत, सरकार FY27 के दूसरे आधे में ₹7.86 ट्रिलियन (₹7.86 लाख करोड़) के संप्रभु बांड जारी करेगी। बांड कार्यक्रम को प्राथमिक बाजार के माध्यम से लागू करने की उम्मीद है, जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक नीलामी प्रक्रिया के नियामक के रूप में कार्य करेगा।
वित्तीय घाटे पर प्रभाव
वित्तीय विश्लेषक बताते हैं कि घटे हुए उधारी अनुमान से FY27 के लिए अनुमानित वित्तीय घाटे को संकुचित होना चाहिए, हालांकि सटीक घाटे का प्रतिशत प्रकट नहीं किया गया। मंत्रालय ने संकेत दिया कि कम उधारी आवश्यकता उच्च कर राजस्व और विलंबित पूंजी व्यय के संयोजन से उत्पन्न हुई है।
बाजार प्रतिभागी बांड जारी करने के कार्यक्रम पर कड़ी नजर रखेंगे, क्योंकि ₹7.86 ट्रिलियन का वॉल्यूम सरकार के वार्षिक ऋण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस जारी करने का आकार घरेलू यील्ड और रुपये के विनिमय दर को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर यदि संस्थागत निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहती है।
बाज़ार की प्रतिक्रिया
बॉन्ड बाज़ार के डीलरों का कहना है कि यह घोषणा सरकारी प्रतिभूतियों के ब्याज दरों पर पड़े अल्पकालिक दबाव को कम कर सकती है, जोकि इस घोषणा से कुछ सप्ताह पहले मामूली रूप से बढ़ी थीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उधार लेने के लक्ष्य में कमी का स्पष्ट संकेत सरकारी वित्तीय प्रबंधन में निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर सकता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, जिनके पास भारतीय सार्वजनिक ऋण का बढ़ता हिस्सा है, संशोधित उधार योजना का मूल्यांकन वैश्विक जोखिम-भावना और संयुक्त राज्य अमेरिका के फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति के संदर्भ में करने की उम्मीद है।
नीतिगत संदर्भ
उधार में यह संशोधन 2026 के बजट में वर्णित सरकार के व्यापक वित्तीय संकीर्णता (फिस्कल कंसोलिडेशन) एजेंडे के अनुरूप है। वित्त मंत्रालय ने पहले ही वित्त वर्ष 2027 तक वित्तीय घाटे को जीडीपी के 5 प्रतिशत से नीचे रखने का वचन दिया था, और वर्तमान उधार में कमी इस लक्ष्य की ओर迈 एक कदम के रूप में प्रस्तुत की गई है।
बॉन्ड बिक्री के अलावा, मंत्रालय ने कहा कि वह शेष वित्त पोषण की कमी को पूरा करने के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार और बहुपक्षीय ऋण सहित वैकल्पिक वित्त पोषण के माध्यमों का पता लगाना जारी रखेगा।
आगामी कदम
₹7.86 लाख करोड़ के बॉन्ड जारी करने की पहली किस्त अक्टूबर 2026 में निर्धारित है, जबकि बाद की किस्तें मार्च 2027 तक नियमित अंतराल पर नीलामी के लिए रखी जाएंगी। भारतीय रिज़र्व बैंक आगामी दिनों में नीलामी कैलेंडर और बोली गाइडलाइन प्रकाशित करेगा।