नई दिल्ली — सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय ने 24 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें न्यायालय से अनुरोध किया गया कि ओबीसी के क्रीमी लेयर पर हालिया निर्णय को लागू करने के लिए दो‑वर्ष की अवधि दी जाए। यह अनुरोध सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती में अचानक व्यवधान को रोकने और राज्य सरकारों को अपनी आरक्षण सूचियों को संशोधित करने के लिए समय देने हेतु किया गया है।
क्रीमी‑लेयर निर्णय का पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट का 2023 में जारी निर्णय स्पष्ट करता है कि “क्रीमी लेयर” – अन्य पिछड़े वर्गों के समृद्ध और बेहतर शिक्षित सदस्य – को आरक्षण लाभों से बाहर रखा जाना चाहिए। यह निर्णय ओबीसी वर्ग के भीतर सबसे वंचित लोगों तक लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से लिया गया था। हालांकि, न्यायालय ने आदेश के प्रत्यावर्ती या प्रत्याशित अनुप्रयोग को निर्दिष्ट नहीं किया, जिससे सरकार पर यह निर्भर रह गया कि परिवर्तन को कैसे लागू किया जाए।
केंद्र का प्रत्याशित प्रभाव के लिए याचिका
अपनी याचिका में, मंत्रालय ने तर्क दिया कि प्रत्याशित प्रभाव चल रही भर्ती अभियानों में तत्काल उथल‑पुथल से बचाएगा। उन्होंने “दो‑वर्ष की अवधि” की आवश्यकता पर प्रकाश डाला ताकि पात्रता सूचियों को संशोधित किया जा सके, भर्ती सूचनाओं को अद्यतन किया जा सके, और प्रभावित उम्मीदवारों के बीच जागरूकता अभियान चलाए जा सकें। यह याचिका सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा, मंत्रालय के सचिव के प्रतिनिधित्व में, सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली बेंच में दायर की गई।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
हिंदु द्वारा रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के अनुरोध पर आदेश आरक्षित कर रखे हैं। बेंच ने याचिका की समीक्षा करने पर सहमति व्यक्त की है, परंतु अभी तक कोई निर्णय जारी नहीं किया गया है। आदेश आरक्षित करने का निर्णय यह संकेत देता है कि न्यायालय कानूनी तर्कों और सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती पर संभावित प्रभाव पर विचार करेगा, इससे पहले कि वह अनुरोधित अवधि को मंजूरी दे।
ओबीसी भर्ती पर प्रभाव
यदि न्यायालय दो‑वर्षीय अवधि प्रदान करता है, तो ओबीसी अभ्यर्थी मौजूदा क्रीमी‑लेयर मानदंड के तहत पदों के लिए अंतिम तिथि तक आवेदन जारी रख सकेंगे। इस अवधि समाप्त होने के बाद, अद्यतन सूचियों में क्रीमी लेयर में आने वाले उम्मीदवारों को बाहर रखा जाएगा, जिससे आरक्षण के पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों की संख्या में संभावित कमी आ सकती है। सरकार ने कहा है कि वह संशोधित दिशानिर्देश प्रकाशित करेगी और नई सूचियों को अंतिम रूप देने से पूर्व सार्वजनिक परामर्श आयोजित करेगी।
हितधारकों की प्रतिक्रियाएँ
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित अवधि भर्ती में “अचानक व्यवधान को रोकने” और “प्रशासनिक समायोजन के लिए पर्याप्त समय प्रदान करने” में सहायक होगी। निर्णय को स्थगित करने के लिए न्यायालय का आदेश सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की बड़ी संख्या को प्रभावित करने वाली नीति परिवर्तनों के प्रति न्यायपालिका के सतर्क दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। अब तक कोई विपक्षी दल या नागरिक समाज समूह इस याचिका पर कोई बयान नहीं दे पाया है, और मामला अभी न्यायिक समीक्षा में बना हुआ है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Centre pleads for prospective effect of SC creamy layer ruling
- Supreme Court reserves orders on Centre’s plea for two-year window to fix OBC creamy layer
- Supreme Court agrees to examine Centre’s plea for prospective effect of OBC creamy-layer v
- Centre seeks two-year window to implement SC ruling on OBC creamy layer, avoid recruitment